बज़ आलमे-शक ता ब यकीं यक नफ़्स अस्त
ईं यक नफ़से-अज़ीज रा ख़ुश मी दार
कज़ हासिले-उम्रे - मा हमीं यक नफ़स अस्त
कुफ़्र की मंज़िल से दीं बस एक साँस है
शक से यक़ीन आने तक बस एक साँस है
ऐसी अज़ीज़ साँस को तू ख़ूबसूरत जान
तिरी ज़िंदगी का हासिल यही एक साँस है
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