आयद ज़ तुराब चूँ ख़म ज़ेरे-तुराब
ता बर सरे-ख़ाक़े-मन रसद मुख़्मूरे
अज़ बू-ए-तराबे-मन शवद मस्तो-ख़राब
मय इतनी पीता हूँ कि जब ख़ाक में मिल जाऊँ
मैं शराब की ख़ुशबू से मिट्टी को इतना महकाऊँ
औ' पीने वाले जब मेरी मिट्टी के पास पहुँच जाएँ
मस्तो-ख़राब ख़ाक की ख़ुशबू से उनको कर पाऊँ
I take wine this way that when I die.
From my soil it's smell' d go sky high.
When drunkards gather near my grave
Smell casts spell, lose way if they try.
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