Wednesday, 19 March 2025

उमर ख़य्याम की रुबाई... ख़्वाहीद ब फ़िराक़ दर फ़ुग़ाँ दार म रा....

ख़्वाह ब फ़िराक़ दर फ़ुग़ाँ दार म रा
ख़्वाही ज़ विसाले-शादमाँ दार म रा
ज़िन्हार न गोयम कि चसाँ दार म रा
ज़ इंसाँ वि दिलत ख़्वास्त चुनाँ दार म रा


गर तू चाहे मुझे फ़िराक़ में रुलाए रखना
गर तू चाहे विसाल में ख़ुश बनाए रखना
मैं तो नहीं कहूँगा कि इस तरह मुझे रख
जैसे तिरा मन चाहे मुझे वैसा बनाए रखना


If you want me to be sad 'n parted, let it  be so..
If you want me to be glad' n united, let it be so.
I shall never say that you keep me in this way. 
The manner you want me to be in, let it be so. 


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