Sunday, 23 March 2025

उमर ख़य्याम की रुबाई... अजज़ा - ए-प्याला कि दर मय पैवस्त.....



अजज़ा - ए-प्याला कि  दर  मय   पैवस्त 
ब शिकस्तने-आँ    ख़ाँ   नमीदारद   दस्त 
चंदीं      सरो-दस्ते-नाज़नी    नियाने-जहाँ 
अज़ मेहरे कि पैवस्तो-बकीने कि शिकस्त 

प्याले के अजज़ा मय से पैवस्त रहे हैं
न ये हात के लिए तोड़ने लायक शै हैं
प्यार जोड़ता है नफ़रत ही इन्हें तोड़ती 
ये तो जग सुन्दरियों के सर हात रहे हैं 


Wine related were all parts of the glass. 
Never was worthy of breaking the glass.
These were held by beauties of world. 
Love joins and hate shatters the glass. 



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