Thursday, 27 March 2025

उमर ख़य्याम की रुबाई... इम्रोज़ तुरा दस्त रसे-फ़र्दा नेस्त......

इम्रोज़   तुरा   दस्त    रसे-फ़र्दा     नेस्त
वन्देशा-ए-फ़र्दास्त   जुज़   सौदा   अस्त
ज़ाँ या' मकुन ईंदम अर दिलत शैदा नेस्त
कीं    बाक़ी    उ'म्ररा    बहा   पैदा   नेस्त


आने वाले कल तक तेरा दस्त नहीं पहुँचेगा
फ़र्दा का अन्देशा पागलपन है, कुछ नहीं मिलेगा
दिल तेरा शैदा है अगर, ये पल ज़ाया मत कर
कल की दौलत पैदा होगी, अब कुछ नहीं मिलेगा 


'morrow is yet to arrive, 
with it you can't survive. 
Whatever was past drive, 
was frenzy, it won't thrive. 
If lunatic is your heart, 
hold each moment it's part.
Wealth of age to arrive, 
is unborn, can't let thrive. 



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