Sunday, 16 March 2025

उमर ख़य्याम की रुबाई... अज़ बादः-ए-नाब ला'ल शुद गौहरे - मा....

अज़ बादः-ए-नाब ला'ल शुद गौहरे - मा
आमद    बफ़ुग़ाँ   ज़   दस्त    साग़रे-मा
अज़ लब कि हमी ख़ुरेम मय बर सरे-मय
मा दर सरे-मय   शुदेमो-मय   दर-सरे-मा


ख़ालिस मय से मेरा मोती बदल गया गौहर में 
चीख़ रही है मेरे हाथों आई मय साग़र में 
इसीलिए पीता हूँ हरदम होंटों से मैं मय को
मैं ख़ुद मय के सर मे हूँ और मय है मेरे सर मे ं


My pearl got lustre touching  pure wine. 
Goblet is in hand, yet wails cure, wine. 
I always take sips, of wine with the lips. 
Wine is in my head, it's in for sure, wine 




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