Sunday, 16 March 2025

CHOSEN COUPLETS FOR HYDERABAD

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता 
बशीर बद्र 

Helplessness must have come in way. 
No one is disloyal just for say. 

एक आँसू ने डुबोया मुझ को उनकी बज़्म में
बूँद भर पानी से सारी आबरू पानी हुई
ज़ौक़ 

In her gathering a single tear drowned my entity. 
A drop of water, watered down all of my dignity.

मय-कदा है यहाँ सुकून से बैठ 
कोई आफ़त इधर नहीं आती 
अब्दुल हमीद अदम

It's a tavern, peacefully stay. 
No calamity comes this way

मिट्टी से बन कर तप कर ही तो बन पाया है प्याला
अंगूरों को विघटित करके ही तो बनती है हाला
बनने का विघटन का चक्र यहाँ भी चलता रहता है
शायद यही खींच लाता हैमानव को भी मधुशाला। 

सुन पाऊँगा रुनझुन मैं जब आएगी साक़ीबाला
मिल जाएँगे बन्धु वहीं पर लिए हुए कर में प्याला
जर्जर तन के टूटे मन के सब संताप भुलाती है
इसीलिए तो शाम ढले ही आ जाता हूँ मधुशाला 

ऊँच नीच का अन्तर करता नहीं कभी कोई प्याला 
जाति धर्म का भेद नहीं होता जब ढलती है हाला
साक़ी की मुस्कान बिखरती ही है चारों ओर यहाँ 
अन्तर करते हैं धर्मस्थल समदर्शी है मधुशाला। 

तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो 
तुम को देखें कि तुम से बात करें
फ़िराक़ गोरखपुरी 

You are addressing me from so near. 
Should I talk with or look at you dear? 

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