तब नया-नया पापा बन कर मन फूला नहीं समाया था।
श्यामा का रक्त तो मेरे रक्त से मेल ही नहीं खाता था।
इसीलिए डर लगता था जब जन्म समय आ जाता था।
जब प्यारी राजकुमारी सी बच्ची को गोद खिलाया था।
तब नया-नया पापा बन कर मन फूला नहीं समाया था।।
भाषा में महारत हासिल है, कविता में महारत हासिल है।
है ज्ञान सभी सुर-तालों का, साज़ों में महारत हासिल है।
उत्तम रहने की ही धुन गुण, बन जाती है बिटिया अवगुण।
जब इसे ढूढती जन-जन में, बस रख बिटिया इसको मन में।
फिर सब अपने हो जाएँगे, पूरे सपने हो जाएँगे।।
है जन्मदिवस आशीश यही, कर पाए तू हर काम सही।।
रवि मौन
कोशिश करूँगी पापा, कविता के लिए बहुत बहुत धन्यवाद😁🙏
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